1947 का बंटवारा सिर्फ नक्शे पर खींची गई एक बेदर्द लकीर नहीं था, यह करोड़ों दिलों, साझी तहज़ीब और सदियों पुरानी यादों का निर्मम क़त्ल था। क्या अगर भगत सिंह जीवित होते, तो मुल्क के दो टुकड़े होने देते? अगर नेताजी सुभाष चंद्र बोस होते, तो क्या वे इसके खिलाफ सड़कों पर नहीं उतरते? और जो लोग जिन्ना के एक ..