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Gaurav Gatha : Bhule Hue Naykon Ka Bharat

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क्या भारत केवल वह है जो हमें पाठ्य पुस्तकों में पढ़ाया गया है?

यह पुस्तक उस प्रश्न का उत्तर है, जो वर्षों से भारतीय आत्मा को कचोटता रहा हैहमारे असली नायक कौनथे?

यहाँ आप पाएँगे:

  वो संत, जिनकी वाणी ने जनचेतना को जाग्रत किया;

  वे वीर, जिन्होंने आत्मबलिदान से स्वतंत्रता के दीप जलाए;

  वो इतिहास के पृष्ठ जिनमें छुपी हैं हमारे गौरव की गाथाएँ, जिन्हें योजनाबद्ध रूप से भुलाया गया।

यह पुस्तक उन नायकों की जीवंत स्मृति है, जिन्हें औपचारिक इतिहास ने उपेक्षित किया, पर जिनकी गाथाएँ आज भी लोककथाओं, मंदिरों के शिलालेखों, स्मारकों और जनमानस की स्मृति में सुरक्षित हैं। यह इतिहास का वह विमर्श है जो सत्ता-प्रेरित पाठ्यक्रमों से परे जाकर भारत की सांस्कृतिक चेतना, वैदिक परंपरा, समाज-सुधार आंदोलनों और स्वतंत्रता संग्राम के विविध रूपों को पुनः उद्घाटित करता है। लेखक एक गहन शोध और प्रतिबद्ध लेखनी के माध्यम से हमें उस भारत से परिचित कराते हैं जो केवल भूगोल नहीं, बल्कि जीवंत आत्मा है।यह केवल इतिहास नहीं, यह एक राष्ट्रीयस्मृतियात्रा हैअस्मिता, कर्तव्य और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व की ओर ।

डॉ. यशपालसिंह(जन्म-गांवकिरठल,उ प्र.).एकप्रख्यातलेखक, शिक्षाविद् और सामाजिक चिंतक हैं  । प्रारंभिक शिक्षा- वाराणसी संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी, के अधीनस्थ आर्य महाविद्यालय, कि रठल । जनता वैदिक कॉलेज बड़ौत से स्नातक (कृषि ऑनर्स) तथा कृषि वनस्पति विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि । गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर में शोध सहायक के पद पर नियुक्त हुए और सेवारत रह कर पीएच डी. की . वे मृदा स्वास्थ्य और विभिन् आवश्यक पोषक तत्वों की अनुशंसा देकर किसानों को लाभान्वित करते रहे। सन् 2020 में कृषि वैज्ञानिक के पद से सेवानिवृत्त होने के पश्चात् आपने सामाजिक रूप से सक्रियता दिखाई है। ग्रामीण समाज की रत्न गर्भा की शोधपर‘कीर्तिवंतकिरठल’नामक ग्रंथ की रचना की।