
- Brand: Pravasi Prem Publishing India
- Language: Hindi
- Weight: 243.00g
- Dimensions: 22.00cm x 13.00cm x 1.60cm
- Page Count: 92
- ISBN: 9788198946287
जब जड़ें एक ज़मीन पर हों, और आकाश कहीं और, तो दिल हमेशा एक 'अंतर्द्वंद्व' में जीता है। ओस्लो, नॉर्वे की बर्फीली हवाओं और भारत
की गर्मजोशी भरी स्मृतियों के बीच, यह संग्रह उसी प्रवासी मन की अनकही दास्तान है।
क्या सच में कोई किसी दूसरे देश का हो पाता है?
इस संग्रह की कविताएँ सिर्फ़ देश-विदेश के भूगोल की
बात नहीं करतीं। वे उन बारीक रिश्तों की पड़ताल करती हैं जो छूट गए, जो बिखर गए, और जो तमाम दूरियों के बावजूद आज
भी हमारे भीतर धड़कते हैं।
- बचपन की गलियाँ और नए शहर का
कोना।
- टूटे हुए वादे और जुड़ते हुए
नए रिश्ते।
- परम्पराओं का मोह और
आधुनिकता की पुकार।
लेखिका ने इन कविताओं में निर्वासित जीवन के दर्द, सांस्कृतिक दूरी के अकेलेपन, और घर वापसी की अनसुलझी चाहत को अपनी सहज, सरल और संवेदनशील भाषा में उकेरा है। यह संग्रह हर
उस व्यक्ति के लिए है जिसने कभी परदेश में अपनों को याद किया है, और अपने भीतर एक 'अधूरेपन' को महसूस किया है।
यह सिर्फ़ कविता नहीं, एक 'प्रवासी हृदय' की धड़कन है जो दूर रहकर भी अपनी
माटी को नहीं भूल पाया।
